हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी (Bhishma Dwadashi 2026) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले गंगापुत्र भीष्म को समर्पित है, बल्कि पितृ ऋण से मुक्ति पाने का सबसे शक्तिशाली अवसर भी है।
Astromadhupriya के इस विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण में हम जानेंगे कि कैसे 2026 की भीष्म द्वादशी आपके जीवन से संतान बाधा और पितृ दोष के अंधेरे को दूर कर सकती है।

भीष्म द्वादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में भीष्म द्वादशी की तिथि को लेकर गणना अत्यंत सटीक है। इस दिन तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भीष्म द्वादशी तिथि: 30 जनवरी 2026
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 29 जनवरी 2026, शाम 06:14 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: 30 जनवरी 2026, दोपहर 04:20 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 से 03:06 तक (दान और पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ)
पितरों के तर्पण के साथ क्यों जुड़ा है यह पर्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर माघ अष्टमी को प्राण त्यागे थे, लेकिन उनकी अंतिम अंत्येष्टि और तर्पण की रस्में द्वादशी तिथि तक पूर्ण की गई थीं। यही कारण है कि इस दिन को ‘भीष्म द्वादशी’ कहा जाता है।
Astromadhupriya का मानना है कि भीष्म पितामह नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे, उनका अपना कोई वंश नहीं था। इसलिए धर्मशास्त्रों के अनुसार, कोई भी सामान्य व्यक्ति उनके निमित्त तर्पण कर सकता है। ऐसा करने से जातक को अपने स्वयं के पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कुंडली में मौजूद भयानक से भयानक पितृ दोष शांत हो जाता है।
संतान सुख और पितृ दोष निवारण के उपाय
यदि आप लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं या परिवार में कलह रहती है, तो 2026 की भीष्म द्वादशी पर ये Trending Phrases वाले उपाय अवश्य अपनाएं:
भीष्म तर्पण: एक तांबे के पात्र में गंगाजल, दूध, कुशा और काले तिल लेकर ‘भीष्म: शांतनवो वीर:’ मंत्र का जाप करते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें।
संतान प्राप्ति हेतु: इस दिन भगवान विष्णु के सम्मुख ‘संतान गोपाल मंत्र’ का जाप करें। माना जाता है कि भीष्म द्वादशी पर पितरों की प्रसन्नता सीधे वंश वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
दीप दान: संध्या काल में पीपल के वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
भीष्म द्वादशी का ज्योतिषीय महत्व
क्या आपकी कुंडली के पंचम भाव में राहु बैठा है? या सूर्य-शनि की युति आपको सफलता से रोक रही है? ज्योतिष शास्त्र में भीष्म द्वादशी को ‘मोक्षदायिनी तिथि’ कहा गया है।
जागरूकता: बहुत से लोग पितृ दोष को केवल श्राद्ध पक्ष तक सीमित मानते हैं, लेकिन भीष्म द्वादशी इसका ‘शॉर्टकट’ निवारण है।
विचार: यदि आपके कार्यों में बार-बार रुकावट आ रही है, तो यह पितृ दोष के लक्षण हो सकते हैं।
निर्णय: 30 जनवरी 2026 का मुहूर्त इस दोष को जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी समय है।
निष्कर्ष और परामर्श
भीष्म द्वादशी का पर्व हमें अनुशासन, त्याग और पितृ भक्ति की सीख देता है। 2026 में बनने वाला यह दुर्लभ संयोग आपके जीवन में खुशहाली और वंश वृद्धि लेकर आ सकता है।
क्या आपकी कुंडली में भी है पितृ दोष? अधूरे ज्ञान के साथ उपाय करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लें। अपनी जन्मपत्री का विस्तार से विश्लेषण करवाने और पितृ दोष निवारण पूजा की सही विधि जानने के लिए आज ही Astromadhupriya के अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श लें।